इस धनतेरस कैसे कमाए बहुत सारा धन। धनलक्ष्मी होगी मेहरबान
क्या आप बहुत सरा धन अर्जित करना चाहते है,
साल भर इससे बढ़ाना चाहते है.
धनतेरस को पूजा करने का समय अथवा धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त:
धनतेरस पूजा मुहूर्त- शाम 07.08 बजे से रात 8.14 बजे तक
अवधि- 1 घंटा 06 मिनट
पूजन सामग्री:
१. 21 पूरे कमल बीज (कमल गट्टे की माला )
मणि पत्थर के 5 प्रकार
5 पूरी सुपारी
5 पूरी सुपारी
(रजत लक्ष्मी - गणेश के सिक्कों की एक संख्या
(10 ग्राम या अधिक ये हो तो रखे आवश्यक नहीं)
(10 ग्राम या अधिक ये हो तो रखे आवश्यक नहीं)
अगरबत्ती, चूड़ी, तुलसी पत्र, पान, बहीखाता (हिसाब किताब), चंदन, लौंग, नारियल, सिक्के, काजल, दही, शरीफा, धूप, फूल, चावल ,रोली, गंगा जल ( पवित्र जल), माला, हल्दी, हनी, जनेऊ, कपूर, केसर, मेहँदी, दूध, एक दीपक आटा से बना, पायल, पेन (कलाम), इत्र, फोटो या देवी लक्ष्मी की प्रतिमा, लाल सूती कपड़े
( सात प्रकार का अनाज), छोटी कटोरी या लोटा, सरस्वती की मूर्ति, भगवान गणेश की प्रतिमा, चीनी, गन्ना, मिठाई, कच्चा चावल, बाती, तेल / घी और माचिस|
( सात प्रकार का अनाज), छोटी कटोरी या लोटा, सरस्वती की मूर्ति, भगवान गणेश की प्रतिमा, चीनी, गन्ना, मिठाई, कच्चा चावल, बाती, तेल / घी और माचिस|
यह सारीदी गई सामग्री यदि ना होतो, श्रद्धा पूर्वक प्रसाद और दीपक जला ले व लक्ष्मी माता तथा गणेश भगवान की पूजा करे।
पुजनविधि, धनतेरस की पूजा करने की विधि:
- संध्याकाल में उत्तर की ओर कुबेर तथा धन्वन्तरी की स्थापना करें.
- दोनों के सामने एक-एक मुख का घी का दीपक जलाएं.
- कुबेर को सफेद मिठाई और धन्वन्तरि को पीली मिठाई चढ़ाएं.
पहले "ॐ ह्रीं कुबेराय नमः" का जाप करें.
फिर "धन्वन्तरि स्तोत्र" का पाठ करें.
धन्वान्तारी पूजा के बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पंचोपचार पूजा करना अनिवार्य है.
भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के लिए मिट्टी के दीप जलाएं. धुप जलाकर उनकी पूजा करें.
भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के चरणों में फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं. प्रसाद ग्रहण करें
पूजा के बाद, दीपावली पर, कुबेर को धन स्थान पर और धन्वन्तरि को पूजा स्थान पर स्थापित करें.
यम का दीप भी जलाएं
- घर में पहले से दीपक जलाकर यम का दीपक ना निकालें. दीपक जलाने से पहले उसकी पूजा करें.
- किसी लकड़ी के बेंच पर या जमीन पर तख्त रखकर रोली के माध्यम से स्वस्तिक का निशान बनायें.
- फिर एक मिट्टी के चौमुखी दीपक या आटे से बने चौमुखी दीप को उस पर रखें.
- दीप के आसपास तीन बार गंगा जल का छिड़काव करें.
- दीप पर रोली का तिलक लगाएं. उसके बाद तिलक पर चावल रखें.
- दीप पर थोड़े फूल चढ़ाएं.
- दीप में थोड़ी चीनी डालें.
- इसके बाद 1 रुपये का सिक्का दीप में डालें.
- परिवार के सदस्यों को तिलक लगाएं.
- दीप को प्रणाम करें.
- दीप को घर के गेट के पास रखें. उसे दाहिने तरफ रखें और यह सुनिश्चित करें की दीप की लौ दक्षिण दिशा की तरफ हो.
- चूंकि यह दीपक मृत्यु के नियन्त्रक देव यमराज के निमित्त जलाया जाता है, इसलिए दीप जलाते समय पूर्ण श्रद्धा से उन्हें नमन तो करें ही, साथ ही यह भी प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार पर दया दृष्टि बनाए रखें और किसी की अकाल मृत्यु न हों।





Comments
Post a Comment